ग्राम
जागरूकता
में राष्ट्रीय
सेवा योजना की भूमिका
(ग्राम-नगपुरा जिला-दुर्ग
छत्तीसगढ़
के विशेष
संदर्भ
में
मंजुलता
साव
घनश्याम सिंह आर्य कन्या महाविद्यालय दुर्ग (छग
1. परिचय: समाज सेवा के माध्यम से व्यक्तित्व का विकास इस परम् वाक्य को भारत के राष्ट्रीय पटल पर केवल सिद्धान्त रूप में न रखते हुए कार्य रूप में परिणित करने हेतु एवं डाॅ. राधाकृष्णन आयोग द्वारा प्रस्तुत मान्यताओं के अनुरूप शैक्षणिक कार्यक्रम को सामाजीकरण करने के उद्देश्य से 24 सितम्बर 1969 को राष्ट्रीय सेवा योजना का श्रीगणेश भारतवर्ष में किया गया। युवा शक्ति को इस कार्यक्रम के माध्यम से ऐसे विविध कार्यों से जोड़ा जाता है, जिससे वे सहभागिता, सेवा एवं उपलब्धियों के बारे में स्वतः जागरूक हो सकें, साथ ही ग्रामीण एवं शहरी बस्तियों के लोगों के सामाजिक-आर्थिक विकास की योजनाएँ बनाकर उसे स्वयं क्रियान्वित कर सकें। विद्यार्थियों में व्यक्तित्व विकास, नेतृत्व, परस्पर एकता एवं समझदारी, अनुशासन, राष्ट्रीय एकता एवं देशप्रेम आदि राष्ट्रीय गुणों के विकास का रासेयो एक सशक्त मंच है।
घनश्याम सिंह आर्य कन्या महाविद्यालय, दुर्ग में रासेयो के कार्यक्रम अधिकारी के रूप में 22 से 28 दिसम्बर 2008 तक शिविर ग्राम-नगपुरा, जिला-दुर्ग (छ.ग.) में आयोजित किया गया था। इस सात दिवसीय शिविर में विभिन्न प्रकार के गतिविधियों का संचालन शिविर में भाग लेने वाली 50 छात्राओं एवं ग्रामवासियों के सहयोग से किया गया।
नगपुरा: ग्राम नगपुरा, दुर्ग जिले में दुर्ग से लगभग 20 किमी की दूरी पर उत्तर दिशा में स्थित है। इस गांव का क्षेत्रफल 431 हेक्टेयर है। इस गांव की पहचान कई कारणों से छत्तीसगढ़ में है। यहाँ पर नैचरोपैथी एवं योग से संबंधित एक महाविद्यालय है। यहाँ की एक पुरानी मंदिर प्रसिद्ध है। यहाँ के निवासियों के बारे में सारिणी क्रमांक 01 में विस्तार से दी गई है:-
सारणी क्रमांक - 01 नगपुरा ग्राम की जनसंख्या का वितरण
लिंग जनसंख्या कुल
सामान्य अनु.जाति अनु.जनजाति
पुरुष 366 129 34 529
स्त्री 363 121 41 528
कुल 729 250 75 1054
ग्राम में उपलब्ध सुविधाएँ: इस गांव में एक प्राथमिक स्कूल, एक मिडिल स्कूल, एक हाईस्कूल, एक हायर सेकेण्डरी स्कूल एवं एक नैचरोपैथी एवं योगा महाविद्यालय स्थित है। इसका गांव में एक प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र भी है।
2. रासेयो शिविर का उद्देश्य: रासेयो शिविर, जो कि नगपुरा ग्राम में दिनांक 22 दिसम्बर से 28 दिसम्बर 2008 के मध्य 50 छात्राओं के साथ आयोजित किया गया था, इस रासेयो के दिशा-निर्देश के साथ ही प्रमुख उद्देश्य निम्नानुसार था:-
1. ग्राम नागपुरा के बालक-बालिकाओं (9 वीं से 12 वीं कक्षा तक) में नशा के बारे में जागरूकता पैदा करना।
2. बालक-बालिकाओं (9 वीं से 12 वीं कक्षा तक) में पर्यावरण के प्रति जागरूकता पैदा करना।
3. बालिकाओं (9 वीं से 12 वीं कक्षा तक) को व्यक्तिगत स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता एवं बीमारियों से बचाव हेतु उपायों से अवगत कराना।
4. महिलाओं को सम्पत्ति के अधिकार के बारे में अवगत कराना।
5. गाँव के निवासियों को पंचायत अधिनियम के तहत् अधिकारों की जानकारी प्रदान करना।
3. अध्ययन की प्रविधियाँ: रासेयो शिविर अपने उद्देश्यों के अनुरूप सात दिवसीय कार्यक्रमों को सम्पन्न करने में सफल रहा। इस हेतु 50 छात्राओं के साथ ही गांव के हाईस्कूल एवं हायर सेकेण्डरी स्कूल के बालक-बालिकाओं का पूरा सहयोग लिया गया। गांव की महिलाएँ एवं पुरुषों के साथ मिलकर कई कार्यक्रम सम्पन्न किए गए। सभी कार्यक्रम सहभागिता के आधार पर पूर्ण किए गए। इस हेतु अतिथि के रूप में अनेक गणमान्य नागरिक शिविर में अपनी सेवाएँ दी। प्राथमिक आंकड़ों का संकलन साक्षात्कार अनुसूची के माध्यम से किया गया। कुछ एक उत्तरीय एवं कुछ बहुउत्तरीय प्रश्न रखे गए थे ।
सारणी क्रमांक - 02 बालक-बालिकाओं का नशा के बारे में जानकारी
क्र. नशा का नाम बालक बालिका कुल
जानकारी है (ः) नहीं है (ः) जानकारी है (ः) नहीं है (ः) जानकारी है (ः) नहीं है (ः)
1. तम्बाकू 100ण्00 00ण्00 100ण्00 00ण्00 100ण्00 00ण्00
2. गुड़ाखू 100ण्00 00ण्00 100ण्00 00ण्00 100ण्00 00ण्00
3. बीड़ी 100ण्00 00ण्00 100ण्00 00ण्00 100ण्00 00ण्00
4. सिगरेट 100ण्00 00ण्00 100ण्00 00ण्00 100ण्00 00ण्00
5. शराब 100ण्00 00ण्00 100ण्00 00ण्00 100ण्00 00ण्00
6. ताड़ी 50ण्00 50ण्00 60ण्00 40ण्00 55ण्00 45ण्00
7. गांजा 80ण्00 20ण्00 60ण्00 40ण्00 70ण्00 30ण्00
8. भांग 80ण्00 20ण्00 60ण्00 40ण्00 70ण्00 30ण्00
9. अफीम 50ण्00 50ण्00 40ण्00 60ण्00 45ण्00 55ण्00
10. ड्रग गोलियाँ 40ण्00 60ण्00 08ण्00 92ण्00 24ण्00 76ण्00
इस सारणी से स्पष्ट है कि ग्रामीण स्तर पर जो नशा सम्बंधी सामग्री उपलब्ध है उसे बालक-बालिकाएँ जानते हैं। इस जानकारी से यह भी स्पष्ट है कि बालिकाएँ नशा के बारे में अपेक्षाकृत कम जानकारी रखती हैं।
सारणी क्रमांक - 03 नशा के प्रभाव के बारे में बालक-बालिकाओं का कथन
क्र. बालक / बालिका नशा के प्रभाव के बारे में कथन कुल
बीमार होना जल्दी मरना परिवार की बर्बादी बच्चों का नशाखोर होना समाज की बर्बादी गाँव की बर्बादी देश की बर्बादी
1. बालक 6
;24ःद्ध 7
;28ःद्ध 4
;16ःद्ध 4
;16ःद्ध 2
;8ःद्ध 1
;4ःद्ध 1
;4ःद्ध 25 ;100ःद्ध
2. बालिका 8
;32ःद्ध 8
;32ःद्ध 4
;16ःद्ध 3
;12ःद्ध 2
;8ःद्ध 0
;0ःद्ध 0
;0ःद्ध 25 ;100ःद्ध
योग 14 ;28ःद्ध 15 ;30ःद्ध 8 ;16ःद्ध 7 ;14ःद्ध 4
;8ःद्ध 1
;2ःद्ध 1
;2ःद्ध 50 ;100ःद्ध
(नोट: इसके लिए एक प्रमुख कारण को चुनना था।) बालकों ने बीमार होने एवं जल्दी मरने को नशा का प्रमुख दुष्प्रभाव माना है। बालिकाओं ने भी इसी दो कारणों को स्वीकार किया है। यह कार्यक्रम एवं अध्ययन श्री हरिशंकर उजाला, नशा उन्मूलन कार्यकर्ता के मुख्य आतिथ्य में सम्पन्न किया गया।
4. विश्लेषण: नगपुरा ग्राम के ग्राम्यजनों के विशेष सहयोग से विभिन्न कार्यक्रम सम्पन्न किए गए:-
प्. बालक-बालिकाओं में नशा के बारे में जागरूकता सम्बंधी कार्यक्रम
इस कार्यक्रम हेतु नौवीं कक्षा से 12 वीं कक्षा तक के 25 बालकों एवं 25 बालिकाओं से साक्षात्कार अनुसूची के माध्यम से रासेयो के छात्राओं ने साक्षात्कार करके नशा के बारे में जानकारी प्राप्त किए ;सारिणी क्रमांक 02द्ध।
प्प्. नशा क्यों नहीं करना चाहिए ? बालक-बालिकाओं का कथन
25 बालकों एवं 25 बालिकाओं द्वारा नशा क्यों नहीं करना चाहिए, इस प्रश्न के जो उत्तर दिए वे सारिणी क्रमांक 03 में दर्शित हैं।
प्प्प्. बालिकाओं में स्वास्थ्य जागरूकता की जानकारी
कुछ प्रमुख रोगों की जानकारी एवं उस रोग का कारण साथ ही उससे कैसे बच सकते हैं। इन प्रश्नों का उत्तर गाँव के उन 25 छात्राओं से प्राप्त किये गये जिन्हें हमने जागरूकता हेतु चुनाव किया था।
सारिणी क्रमांक 4 से स्पष्ट है कि एड्स जैसे बीमारी को बालिकाएँ (80 प्रतिशत) जानती हैं एवं 80 प्रतिशत बालिकाएँ एड्स फैलने का कारण भी जानती हैं, जो इस महामारी से बचने में यह जागरूकता उपयोगी होगी। घेंघा रोग आयोडीन की कमी से होता है एवं आयोडीनयुक्त नमक का उपयोग करना चाहिए। स्वच्छ पानी से डायरिया नहीं होगा, इसकी जानकारी बालिकाओं मेें है।
स्वस्थ शिशु एवं रोगों के बारे में जागरूकता का कार्यक्रम एवं अध्ययन डाॅ. जे.एल. साहू (शिशु रोग विशेषज्ञ) एवं डाॅ. अजय गुप्ता (चर्म रोग विशेषज्ञ) के नेतृत्व में सम्पन्न हुआ।
प्ट. महिलाओं के अधिकार एवं विधिक साक्षरता का अध्ययन
महिलाओं को अपने घर में क्या-क्या अधिकार हैं ? क्या वे उन्हें जानती हैं ? इस संबंध में गाँव के 50 महिलाओं से प्रश्नोत्तर के द्वारा जो उत्तर प्राप्त हुए, उन्हें सारिणी क्रमांक 5 में बताया गया है:-
सारणी क्रमांक - 04 बालिकाओं मेें स्वास्थ्य सम्बंधी जागरूकता
क्र. बीमारी का नाम नाम जानते हैं ;ःद्ध बीमार होने का कारण जानते हैं ;ःद्ध बीमारी से बचने का कारण जानते हैं ;ःद्ध
1. दाद/खाज/
खुजली 25 ;100द्ध 23;92द्ध 18;72द्ध
2. सर्दी/खाँसी 25 ;100द्ध 23;92द्ध 18;72द्ध
3. खून की कमी 25 ;100द्ध 19;76द्ध 22;88द्ध
4. मलेरिया 25 ;100द्ध 25;100द्ध 25;100द्ध
5. छोटी माता 25 ;100द्ध 10;40द्ध 12;48द्ध
6. ब्लड प्रेसर 25 ;100द्ध 12;48द्ध 15;60द्ध
7. सुगर रोग 25 ;100द्ध 10;40द्ध 15;60द्ध
8. हार्ट अटैक 25 ;100द्ध 5;20द्ध 12;48द्ध
9. घेंघा रोग 22 ;88द्ध 17;68द्ध 15;60द्ध
10. सामान्य स्त्री
संबंधी समस्याएं 21 ;84द्ध 9;36द्ध 9;36द्ध
11. टी.बी. 22 ;88द्ध 12;48द्ध 11;44द्ध
12. एड्स 25 ;100द्ध 15;60द्ध 15;60द्ध
13. डायरिया 25 ;100द्ध 20;80द्ध 20;80द्ध
दहेज प्रताड़ना के बारे में 100 प्रतिशत महिलाएं जानती हैं और यह भी जानती हैं कि दहेज प्रताड़ना से जेल हो जाती है। माता-पिता के पारिवारिक जमीन-जायदाद (स्थायी) में पुत्री के अधिकार को भी 90 प्रतिशत महिलाओं ने बताया।
इस कार्यक्रम को सम्पन्न करने हेतु श्री रविशंकर शर्मा (न्यायायिक दण्डाधिकारी, प्रथम श्रेणी), श्री एल.पी.एस. बघेल (न्यायायिक दण्डाधिकारी, प्रथम श्रेणी) एवं श्रीमती श्यामला चैधरी तथा श्री राजेश महाड़िक, वरिष्ठ एड्वोकेट का सहयोग प्राप्त हुआ।
सारणी क्रमांक - 05 महिलाओं में विधिक साक्षरता एवं अधिकार सम्बंधी जागरूकता
क्र. अधिकार संबंधी विधिक साक्षरता जानकार महिलाओं की संख्या प्रतिशत
1. पारिवारिक मकान में हिस्सेदारी 30 60ण्00
2. पारिवारिक जमीन में हिस्सेदारी 31 62ण्0
3. पिता के पूर्वजों से प्राप्त जायदाद पर अधिकार 45 90ण्00
4. स्थायी सम्पत्ति-विक्रय पर सहमति/ असहमति 15 30ण्00
5. यौन उत्पीड़न 12 24ण्00
6. यौन शोषण 12 24ण्00
7. दहेज प्रताड़ना 50 100ण्00
8. दैहिक उत्पीड़न 17 34ण्00
9. स्त्री-पुरुष को समानता का अधिकार 28 56ण्00
10. महिलाओं को निःशुल्क कानूनी सहायता 12 24ण्00
11. महिला आयोग की जानकारी 15 30ण्00
12. ग्राम पंचायत में अधिकार 30 60ण्00
13. ग्राम सभा के अधिकार 30 60ण्00
6. सार संक्षेप: सात दिवसीय रासेयो शिविर नगपुरा ग्राम, जिला दुर्ग (छ.ग.) में दिनांक 22 से 28 दिसम्बर 2008 के मध्य सम्पन्न हुआ। इस शिविर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए एवं विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों की उपस्थिति में छोटे-छोटे अनुसंधान कार्यक्रम एवं गोष्ठियाँ भी आयोजित की गई। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध नशे जैसे गुड़ाखू, तम्बाखू, बीड़ी, सिगरेट एवं शराब से बालक-बालिकाएँ पूर्णतः परिचित हैं, परन्तु अफीम, गांजा, ताड़ी, ड्रग गोलियों से सभी परिचित नहीं है। नशा के दुष्प्रभाव के बारे में अधिकांश बालक-बालिकाओं ने कहा कि नशा के कारण व्यक्ति बीमार हो जाते हैं एवं जल्दी मर जाते हैं। परिवार की बर्बादी एवं बच्चों के नशाखोर होने को भी कईयों ने नशा का दुष्प्रभाव बताया। बालिकाओं में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता में अधिकता देखी गई। एड्स जैसे लाइलाज बीमारी का नाम सभी बालिकाएँ जानती हैं। इसके फैलने के कारणों से भी बालिकाएँ अवगत हैं। इस ज्ञान का कारण वे टी.वी. एवं रेडियो को मानती हैं। अच्छी बात यह है कि यह एक यौनजनित एवं ब्लड चढ़ाने में गलती को एड्स का कारण भी बालिकाएँ जानती हैं। खून की कमी, दाद/खाज/खुजली, सर्दी खाँसी, मलेरिया एवं घेंघा रोग के कारण एवं बचाव के बारे में बालिकाएँ खुलकर चर्चा की। महिलाओं के अधिकार एवं विधिक साक्षरता संबंधी जागरूकता अध्ययन में दहेज प्रताड़ना से सभी महिलाएँ अवगत हैं। साथ ही दहेज के दुष्परिणामों को भी महिलाएँ जानती हैं। महिलाओं को निःशुल्क कानूनी सहायता, महिला आयोग, यौन शोषण, यौन उत्पीड़न आदि पर महिलाएँ जागरूक नहीं हैं, परन्तु पारिवारिक जमीन, स्थायी सम्पत्ति पर अधिकार सम्बंधी जागरूकता अधिकांश महिलाओं मेें हैं।
इस तरह यह अध्ययन दर्शाता है कि शिक्षा के बढ़ते कदम के साथ ग्रामीण लोगों में नशा, स्वास्थ्य, बीमारी एवं महिला अधिकार के प्रति जागरूकता बढ़ रही है।
संदर्भ सूची रू
1ण् राष्ट्रीय सेवा योजना, स्वयं सेवक दैनिन्दनी 1969,
2ण् चन्द्राकर ऋतु ,2006, गोंड़ जनजाति के यौंवनांेन्मुख बालिकाओें में स्वास्थ्य संबंधी जागरुकता एवं समस्याएॅ , एम. एस.-सी अंतिम, क्षेत्रकार्य-प्रतिवेदन
3ण् श्री बनवारी लाल गोंड़ आौर रचनात्मक सेवा कार्य 2001, वन्यजाति नई दिल्ली